Black Taj Mahal of Burhanpur

बुरहानपुर का काला ताजमहल

दोस्तों बुरहानपुर एक ऐसा शहर है जहा कई सच्ची घटनाये कहानियो के रूप में चर्चित है, वैसे तो बुरहानपुर में कई ऐतिहासिक स्थल है पर आज हम बात करेंगे काले ताजमहल की, ऐसी मान्यता है कि वर्तमान ताज महल के सामने यमुना के दूसरी ओर शाहजहां के मकबरे के रूप में काला ताज महल बनाया जाना थालेकिन वह बनाया नहीं जा सका।इस मान्यता से परे सफेद संगमरमरी विख्यात ताज महल के बनने से पहले ही काला ताज महल बन चुका था और यह काला ताज महल यानी शाह नवाज का मकबरा मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर में स्थित है।

आगरा के ताज महल जैसा है काला ताजमहल

एक सच तो यह भी है की आगरा के ताज महल का मध्यप्रदेश के बुरहानपुर से गहरा नाता है, खानदेश की राजधानी रहा बुरहानपुर एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है, जिसे मुगलों की दूसरी राजधानी भी कहा जाता रहा है। बुरहानपुर में पहले तो अकबर, जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब जैसे कई राजाओ, मुगलो ने शासन किया। जब मुगल सम्राट शाहजहां अपने दक्षिण के अभियान पर थे और उनका ठिकाना बुरहानपुर था तब बुरहानपुर में उनकी पत्नी मुमताज महल भी साथ में थी। मुमताज महल की मृत्यु अपने 14वें संतान को जन्म देते समय बुरहानपुर में ही हो गई थी। अपनी प्रिय पत्नी की मृत्यु से शाहजहां को गहरा दुःख हुआ और उन्होंने निर्णय लिया कि मुमताज महल की याद में प्रेम के प्रतीक के रूप में एक बेजोड़ मकबरा बनवाया जाये, और मुमताज महल को बुरहानपुर के जैनाबाद स्थित आहूखाने में दफनाया गया शाहजहां की इच्छा थी कि मकबरा बुरहानपुर में बनाया जाए। देश-विदेश के विख्यात वास्तुकार आए और उन्होंने बताया कि जैसा मकबरा बनाया जाना है, वह ताप्ती नदी के किनारे नहीं बनाया जा सकता। यहां की मिट्टी उस तरह के इमारत के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा राजस्थान के मकराना से संगमरमर लाना भी यहां संभव नहीं दिख रहा था।



क्यों संभव नहीं था बुरहानपुर में काला ताजमहल  का बनना 

बुरहानपुर में ताज महल बनाना भले ही संभव नहीं हो पाया, लेकिन ताज महल का डिजाइन बुरहानपुर में ही तय किया जा रहा था। ताज महल के वास्तु के लिए कई इमारतों डिजाइनों से प्रेरणा ली जा रही थी। सबसे पहले ढांचा मध्यप्रदेश के मांडू स्थित होशंगशाह का मकबरा था जो संगमरमर से बनाया गया था। इससे प्रेरित होकर शाहजहां ने ताज महल को संगमरमर से बनाने का निर्णय लिया। ताज महल के डिजाइन को लेकर एक मान्यता है कि बुरहानपुर के शाही किले में मुमताज महल के लिए बनवाए गए शाही हमाम के एक टाइल्स पर मौजूद डिजाइन ही ताज महल का डिजाइन है। इसके साथ ही बुरहानपुर में काला पत्थर से बना एक आकर्षक मकबरा है, जो ताज महल के बनने से पहले का है और इसका  डिजाइन ताज महल जैसा ही है। इसे ही काला ताज महल  के नाम से जाना जाता है।  

मुग़ल बादशाह से जुड़ा है 

यह काला ताज महल कोई साधारण मकबरा नहीं है, यह मुगल बादशाह के परिवार से ही जुड़ा हुआ है। अकबर के संरक्षक बैरम खां के पुत्र विख्यात कवि रहीम यानी अब्दुर्रहीम खानखाना ने लंबे समय तक बुरहानपुर में अपना समय दिया था। उनके द्वारा रचे गए दोहे आज भी पढ़े जाते हैं और उनके द्वारा तैयार की गई विश्वस्तरीय जल संग्रहण संरचना ‘‘कुंडी भंडारा’’ को आज भी बुरहानपुर में देखा जा सकता है। कवि रहीम की पुत्री जाना की शादी अकबर के तीसरे पुत्र दानियाल के साथ हुई थी और रहीम के पुत्र इरिज मिर्जा ने मुगल बादशाह जहांगीर यानी दानियाल के भाई को दक्षिण के विजय में मदद की थी। जहांगीर ने इरिज मिर्जा को शाह नवाज की उपाधि दी 44 साल की उम्र में शाह नवाज की मृत्यु हो गई। उनकी याद में जहांगीर ने काले पत्थर से इस सुंदर मकबरे का निर्माण करवाया था,  शाह नवाज के इस मकबरे को काला ताज महल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस छोटे से खूबसूरत ढांचे की बनावट आगरा के ताज महल में दिखती है। 



क्या खासियत है 

काला ताज महल बुरहानपुर शहर के आजाद नगर में उतावली नदी के किनारे स्थित है। इस मकबरे के चारों ओर की छोटी मीनारों की तरह ही ताज महल की मीनारें बनाई गई हैं।  इस मकबरे को चौकोर आकार में निर्मित किया गया है। इसमें सामने की ओर एक बगीचा भी है। मकबरे के चारों ओर बरामदा और चारों कोण पर मीनारें हैं। मकबरे का गुंबद और चारों मीनार को सामने से देखने से लगता है कि ताज महल के पूर्वज को देख रहे हैं। मकबरे के भीतरी हिस्से में की गई नक्काशी आज भी स्पष्ट दिखाई देती है। यह बहुत ही आकर्षक है। निश्चय ही इस काले ताज को और बुरहानपुर के दूसरे ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्मारकों को देखना, मुगल इतिहास को एक अलग नजरिए से अनुभव करने जैसा है।

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