क्या है भाई दूज what is bhai dooj

क्या है भाई दूज what is bhai dooj

कहा जाता है की जब नरकासुर काअत्याचार बहुत बढ़ गया तो देवता व ऋषिमुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नराकासुर से मुक्ति दिलाने को कहा और श्रीकृष्ण ने उन्हें आश्वासन भी दे दिया लेकिन नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया और उनकी सहायता से नरकासुर का वध किया। श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करने के पश्चात अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए, उनकी बहन सुभद्रा ने अपने भाई से मिलकर उनका तिलक कर आरती की और पुष्पहारों से आदर सत्कार के साथ स्वागत किया तब से यह परंपरा शुरू हुई और हर वर्ष भाई दूज का त्यौहार मनाया जाने लगा।   


वैसे तो भाई और बहन के बीच एक अनोखा प्यार होता है वे एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त होते है | भाई हमेशा अपनी बहन की रक्षा के लिए तैयार होता है| दोनों  एक-दूसरे के होते है, एक-दूसरे के गुप्त हिस्सेदार भी होते हैं। वैसे तो दिखने के लिए एक दूसरे से बहुत ज़गड़ते है पर दूसरी और वो एक-दूसरे से बिना कोई शर्त के ही प्यार करते हैं।

भाई बहन की भाओनाओ को समझना मुश्किल है Brother sister's feelings are difficult to understand
वैसे तो भाई बहन को आपने अक्सर लड़ते हुवे ही देखा होगा लेकिन दोनों का एक दूसरे के लिए प्यार उतना ही गहरा होता है, सच में भाई-बहन के बीच के प्रेम को समाझना बहुत ही मुश्किल है।  वैसे तो बहुत से दिन या अवसर हैं जो भाई और बहन के बीच प्यार को मजबूत करने के लिए समर्पित हैं। लेकिन इसमें भाईदूज सबसे अलग त्यौहार है।

भगवान से प्रार्थना करती है  बहने  sisters praying to god
इस अद्भुत त्योहार भाईदूज पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के साथ साथ कल्याण और समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करती है और चाहती  है के उनका भाई हमेशा खुश रहे और निरोगी रहे।  

क्या होता  है  इस दिन 
इस दिन बहन अपने भाई का तिलक कर उसे कुछ केले और तोलिया देती है व भोजन कराती है इस दिन बहन अपने भाई की दीर्घायु और सर्व मनोकामना पूर्ति की कामना करती है। यह पर्व भाई के प्रति बहन के स्नेह को व्यक्त करता है। ऐसा माना जाता है की इस दिन भाई यदि अपनी बहन के यहां भोजन करता है तो उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है। 

भाईदूज का महत्व क्या है 
पौराणिक कथा के अनुसार, भाई दूज वाले दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर जाते हैं। उन्होंने यमुना को आशीष दिया था कि भाई दूज वाले दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर जाएगा, तिलक लगवाएगा और भोजन ग्रहण करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और उसे कभी यम का भय नहीं होगा।

यमुना तथा यमराज की कहानी 
यमुना तथा यमराज भाई बहन है। यमुना यमराज से बहुत ज्यादा स्नेह करती थी। इनका जन्म भगवान सोइरी नारायण की पत्नी छाया की कोख से हुआ था। यमुना यमराज को बार - बार अपने घर भोजन करने के लिए बुलाया करती थी लेकिन यमराज अपने कार्य मे व्यस्त होने के कारण हर बार यमुना की बातों को टाल देते थे। एक बार की बात है कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को यमुना यमराज को अपने घर में भोजन करने के लिए वचनबद्ध कर लेती है। यमराज भी सोचते हैं कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूँ मुझे तो कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता लेकिन मेरी बहन मुझसे कितना स्नेह करती है जो इतनी सद्भावना से मुझे अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित कर रही है। तिथि के दिन यमराज बहन यमुना के घर भोजन करने के लिए निकलते है और नरक के सभी जीवों को मुक्त कर देते हैं। यमराज के घर पहुंचते ही यमराज को अपने द्वार में देख यमुना की खुशी का ठिकाना नही रहता और वह सबसे पहले स्नान करके यमराज को तिलक करके भोजन कराती है। यमुना के अपने प्रति स्नेह, आदर और सम्मान को देखकर यमराज खुश हो जाते हैं और यमुना को वर मांगने का आदेश देते हैं। यमुना ने कहा भद्र! इस दिन जो बहन मेरी तरह अपने भाई का आदर, सत्कार और टीका करके भोजन कराये उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्र और आभूषण देकर चले जाते हैं। आज भी यह परंपरा हर बहन अपने भाई के लिए करती चली आ रही है भाई दूज के दिन अपने भाई का तिलक लगाकर उसे खाना खिलाती है  और पूजा कर  उसे मिठाई भी खिलाती है।  

भाईदूज मंत्र 
{गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें }

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