मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में कई ऐतिहासिक स्थल मौजूद है जिसमे से एक सीता गुफा है, सीता गुफा का होना बुरहानपुर के लिए गौरव की बात है क्योकि इस जगफ प्रभु श्रीराम स्वयं आये थे।बुरहानपुर का अस्तित्व सदियों नहीं बल्कि युगों पुराना है। यहाँ कई लोग दावा करते है की बुरहानपुर का वजूद त्रेययुग से है।
सीता नहानी यहाँ है स्थित
प्रभु श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण जी बुरहानपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर बलड़ी गांव के पास भी ठहरे थे। यह जगह आज भी सीता गुफा के नाम से प्रसिद्ध है, यहां एक झरना है जो हमेशा बहता ही रहता है। बुरहानपुर से लगभग 30 किलोमीटर नेपानगर के भीड़ गांव में एक जगह ऐसी है जहा सीता नहानी स्थित है, कहा जाता है की वनवास के दौरान सीता मैया को स्नान के लिए सरोवर नहीं मिला, तो लक्ष्मणजी ने अपने बाण से प्रहार कर यहां पर एक कुंड का निर्माण कर दिया था, जिसमे से आज भी निर्मल धारा बहती रहती है। यह जगह आज भी सीता नहानी के नाम से जानी जाती।
यह है सीता गुफा का नजारा
प्रभु श्रीराम आये थे बुरहानपुर
बुरहानपुर उन पावन स्थलों में शामिल है जहा की भूमि पर हमारे प्रभु श्रीराम के पावन कदम पड़े है। कहा जाता है की 14 वर्ष के वनवास के दौरान हमारे प्रभु श्रीराम बुरहानपुर आये थे। बुरहानपुर शहर के संत महात्माओ द्वारा आज भी कहा जाता है की श्रीराम जब 14 वर्ष के वनवास पर निकले थे तो बुरहानपुर शहर के ठाठर खामला गांव से थोडा सा अंदर की और एक झरना है वहां प्रभु रुके थे। ऐसी मान्यता है की जिस समय प्रभु आये थे उस समय बुरहानपुर को ब्रम्हपुर के नाम से जाना जाता था।
यहाँ अपने पिता का श्राद्ध किया था
हमारे प्रभु श्रीराम ने यहां से निकलने वाली ताप्ती और उतावदी नदी के संगम की जगह पर अपने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था उस दिन के बाद से उस स्थान को रामघाट के नाम से जाना जाता है। यह घाट बुरहानपुर शहर के इतवारा मोहल्ले के नागझिरी घाट के समीप है।
यह है बुरहानपुर के राजघाट का शाम के समय का नजारा
दो राक्षसों का वध कर पंचवटी के लिए हुए रवाना
प्रभु श्रीराम ने ताप्ती नदी के किनारे एक मंदिर भी बनाया था जिसको अब राम झरोखा मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहाँ के पुजारी का कहना है की यह क्षेत्र पहले दंडकारण्य वन का हिस्सा था, जहां खर और दूषण नाम के दो राक्षस रहा करते थे उन राक्षसों ने यहाँ के ऋषि-मुनियों के जीवन में आतंक मचा रखा था, जब श्रीराम यहाँ पहुंचे तो उन्होंने खर-दूषण का अंत कर ऋषि-मुनियों को उनके अत्याचार से मुक्ति दिलाई और ताप्ती नदी को पार कर पंचवटी के लिए रवाना हुए।
प्रभु श्रीराम ने जो राम झरोखा मंदिर बनाया था वहा पर आज श्रीराम की बहुत ही सुन्दर मूर्ति भी स्थित है जिसकी लोग आज भी पूजा करते है। कहा जाता है की रामायण और महाभारत काल के साक्षी रहे इस बुरहानपुर शहर में मौजूद श्रीराम के स्थानों को लेकर लोगों में बहुत आस्था है, उनके साथ लक्ष्मण जी और सीता मैया के अलावा भक्त श्री हनुमान जी भी मौजूद हैं।
राजघाट पर बिच नदी में है हाथी
लगभग 350 साल पहले राजा जयसिंघ युद्ध में मरे हुए अपने हठी की याद में एक हाथी का निर्माण करवाया। इस हाथी का निर्माण नदी में पड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है। ऐसा कहा जाता है की एक बड़ी सी चट्टान को हाथी का आकर दिया गया है जो आज भी नदी के बीचो - बिच स्थित है। सन 2019 में ताप्ती नदी का जलस्तर काफी घट गया था नदी इतनी सुख गई थी के हाथी पूरा दिखने लगा था। इस ताप्ती नदी में जब बाढ़ का पानी अत है तो अच्छे अच्छे पेड़ भी टूट कर बाह जाते है पर इस हाथी पर बाढ़ का कोई असर नहीं हुआ। इस राजघाट का निर्माण राजा जयसिंग ने करवाया था।
यह हाथी नदी के बीचोबीच है यह तस्वीर नदी का जलस्तर कम होने के दौरान ली गई है।
इसी तरह बुरहानपुर में कई ऐतिहासिक स्थल है जिनको आप हमारे ब्लॉग में सर्च है। जैसे असीर का किला जिसका लिंक यह रहा।




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