मैं अक्सर सोचा करता हूँ
क्या यह मेरा काम है जो मुझे सोने नहीं देता
या देश के हालात है जो नींद नहीं आने देते
क्या यह सिर्फ मेरे साथ होता है
या सभी मेरी तरह पूरी रात है जागते रहते
क्या यह मेरा काम है जो मुझे सोने नहीं देता
या देश के हालात है जो नींद नहीं आने देते
क्या यह सिर्फ मेरे साथ होता है
या सभी मेरी तरह पूरी रात है जागते रहते
मैं अक्सर सोचता हूँ
कहीं व्यापार की मार निशान छोड़ जाती है
तो कहीं राजनीति लाशो पर नाचती है
क्या यह सिर्फ मैं देख रहा हूँ
या यह देख कर सभी की आत्मा चीखती है
कहीं व्यापार की मार निशान छोड़ जाती है
तो कहीं राजनीति लाशो पर नाचती है
क्या यह सिर्फ मैं देख रहा हूँ
या यह देख कर सभी की आत्मा चीखती है
मैं अक्सर सोचता हूँ
हर नई सुबह नये सूरज को देखता हूँ
नये कोपल को देख थोड़ा मुस्कुरा जाता हूँ
फिर कहीं से किसी के गुजरने की खबर आती है
और मन ही मन फिर किसी को कोसता हूँ
हर नई सुबह नये सूरज को देखता हूँ
नये कोपल को देख थोड़ा मुस्कुरा जाता हूँ
फिर कहीं से किसी के गुजरने की खबर आती है
और मन ही मन फिर किसी को कोसता हूँ
मैं अक्सर सोचता हूँ
किसकी है गलती, समझने में असफल हूँ
कौन है ज़िम्मेदार, मैं किस से झगड़ लूँ
मासूम चेहरो पे बहते नीर को देखता हूँ
जी करता है अकेला चना हूँ पर भांड फोड़ दूँ
किसकी है गलती, समझने में असफल हूँ
कौन है ज़िम्मेदार, मैं किस से झगड़ लूँ
मासूम चेहरो पे बहते नीर को देखता हूँ
जी करता है अकेला चना हूँ पर भांड फोड़ दूँ
मैं अक्सर सोचता हूँ
थोड़ा चैन थोड़ा सुकून ढूंढता हूँ
मैं मेरा वो पुराना भारत ढूंढता हूँ
यहीं है कहीं, बस थोड़ा धुंधला गया है
मैं युवा मे आज जोशीला भगत और आज़ाद ढूंढता हूँ
थोड़ा चैन थोड़ा सुकून ढूंढता हूँ
मैं मेरा वो पुराना भारत ढूंढता हूँ
यहीं है कहीं, बस थोड़ा धुंधला गया है
मैं युवा मे आज जोशीला भगत और आज़ाद ढूंढता हूँ
मैं अक्सर सोचता हूँ
मेरी परेशानियाँ यूँ तो कम नहीं
पर दुसरो का गम क्या गम नहीं?
मैं थोड़ा हिचकता हूँ पर बोलता हूँ
मैं मेरे देश का बोस ढुढ़ता हूँ
मेरी परेशानियाँ यूँ तो कम नहीं
पर दुसरो का गम क्या गम नहीं?
मैं थोड़ा हिचकता हूँ पर बोलता हूँ
मैं मेरे देश का बोस ढुढ़ता हूँ
कहाँ है वो आवाज़ें जो देश के लिए उठती थी
कहाँ है वो चिंगारी जो संसद मे आग बन बरसती थी
कहाँ है वो अहिंसावादी, जो एक लाठी से जंग जीतते थे
कहाँ है वो भगवाधारी जो देश के लिए लड़ते थे
कहाँ है वो अहिंसावादी, जो एक लाठी से जंग जीतते थे
कहाँ है वो भगवाधारी जो देश के लिए लड़ते थे
मैं अक्सर सोचा करता हूँ
वक़्त की परत शायद मिट्टी सी जमी है
नीचे उसके कुछ ऊमीदें दबी पड़ी है
धुँआ हो गए है हौसले शायद अब
अब शायद सच्चाई भी बुढी हो चुकी है
अरे जाग जाओ, मन का एक दर्द बताता हूँ
मैंने देखा है डर उन आँखों का, तुमको भी दिखाता हूँ
खो दिया लाडले को, पत्थर रख विदा भी कर दिया
उसके जाते ही आँसू बहे कुछ, और माँ ने भी जीवन त्याग दिया
वक़्त की परत शायद मिट्टी सी जमी है
नीचे उसके कुछ ऊमीदें दबी पड़ी है
धुँआ हो गए है हौसले शायद अब
अब शायद सच्चाई भी बुढी हो चुकी है
अरे जाग जाओ, मन का एक दर्द बताता हूँ
मैंने देखा है डर उन आँखों का, तुमको भी दिखाता हूँ
खो दिया लाडले को, पत्थर रख विदा भी कर दिया
उसके जाते ही आँसू बहे कुछ, और माँ ने भी जीवन त्याग दिया
मैं अक्सर सोचता हूँ
क्या मैं जो सोचता हूँ, वही तुम भी सोचते हो?
क्या इस ओछी राजनीति को तुम भी कोसते हो
क्या हम मिलकर इसका रुख बदल सकते है?
क्या सपने सुनहरे भारत के फिर देख सकते हो?
क्या मैं जो सोचता हूँ, वही तुम भी सोचते हो?
क्या इस ओछी राजनीति को तुम भी कोसते हो
क्या हम मिलकर इसका रुख बदल सकते है?
क्या सपने सुनहरे भारत के फिर देख सकते हो?
मैं अक्सर सोचता हूँ
जब सभी के मन मे है एक सी बातें
तो फिर बोलने से क्यों है कतराते
उठो, मिलो साथ बढ़ो आगे
अक्सर इसी से लोग है जीत जाते
मैं जानता हूँ तुम कर सकते हो
देश की दिशा फिर बदल सकते हो
कृष्ण ने कहा था धर्म के लिए लड़ो
तो तुम इंसानियत के लिए तो लड़ ही सकते हो
टटोलो अपने अंदर कहीं एक आवाज़ होगी
जो इन सब से परे सिर्फ तुम्हारी होगी
उसी आवाज़ को ढाल बनाकर आगे बढ़ो
देखना शर्तीय जीत हमारी होगी....
जब सभी के मन मे है एक सी बातें
तो फिर बोलने से क्यों है कतराते
उठो, मिलो साथ बढ़ो आगे
अक्सर इसी से लोग है जीत जाते
मैं जानता हूँ तुम कर सकते हो
देश की दिशा फिर बदल सकते हो
कृष्ण ने कहा था धर्म के लिए लड़ो
तो तुम इंसानियत के लिए तो लड़ ही सकते हो
टटोलो अपने अंदर कहीं एक आवाज़ होगी
जो इन सब से परे सिर्फ तुम्हारी होगी
उसी आवाज़ को ढाल बनाकर आगे बढ़ो
देखना शर्तीय जीत हमारी होगी....

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