अगर बुरहानपुर की मिट्टी में दीमक न होती तो ताज महल आगरा में नहीं बुरहानपुर में होता

यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि अगर बुरहानपुर की मिट्टी में दीमक न होती तो दुनिया के सात अजूबों में से एक ताज महल आगरा में नहीं बुरहानपुर में होता। जी हां यह सच है। काले ताज महल के स्वरूप और बाहर से अंदर की ओर जाने वाले गेट हूबहू आगरा के ताजमहल की याद दिलाते हैं। काले पत्थरों से बने इस काले ताज महल को देखने देश विदेश से पर्यटक आते हैं।  

प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर की एक खास धरोहर काला ताजमहल को देखकर ही मुगल बादशाह ने आगरा में बनाए ताजमहल का आइडिया लिया था। कभी बुरहानपुर की सरजमीं पर बनने वाला सफेद ताजमहल आज आगरा में देश की शान बनकर खड़ा है। आगरा में सफेद संगमरमर का सुंदर ताजमहल अपने आन में रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण जरूर है, पर बुरहानपुर का काला ताजमहल भी एक नायाब धरोहर है। भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग इसे आज भी संरक्षित किए हुए है।
धरोहर का समय समय पर होता है केमिकल से वॉश
धरोहर का समय समय पर केमिकल से वॉश यानी रासायनिक धुलाई व लेपन किया जाता है।  रसायन विभाग भोपाल की टीम द्वारा काला ताज महल की तरह अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को भी समय समय पर केमिकल से वॉश कर संवारा जाता है।

काला ताज महल दरअसल शाहनवाज का मकबरा
इतिहासकार मोहम्मद नौशाद के मुताबिक काला ताजमहल में शाहनवाज खान का मकबरा है। वैसे शाहनवाज खान अब्दुल रहीम खानखाना का बड़ा पुत्र था। उनकी परवरिश बुरहानपुर में ही हुई और उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें मुगल फौज का सेनापति बनाया गया। 44 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई, जिसे बुरहानपुर में उतावली नदी के किनारे दफनाया गया। कुछ दिन बाद उनकी पत्नी का भी देहांत हो गया और उन्हें भी इसी स्थान पर दफनाया गया और इसी की याद में बना है यह शाहनवाज खान का मकबरा। इसे हम साधारण भाषा में काला ताजमहल कहते हैं।

बुरहानपुर के काला ताजमहल को देखकर आती है आगरा के ताज की याद
कहा जाता है कि बुरहानपुर के काला ताजमहल को देखकर ही आगरा के ताजमहल का विचार उपजा था।
यह भी खास-
इस मकबरे का निर्माण आधा काले पत्थर से है और गुंबद ईंट व चूने से बनाया गया है। इसके अंदर बहुत ही अच्छी नक्काशी की गई है जो ईरानी कला का एक बेहतरीन नमूना है। इस मकबरे का निर्माण 1622 से 1623 ईस्वी के बीच हुआ है। इसमें शाहनवाज खान और उनकी बीवी की मजार है। ठीक उसी तरह जिस तरह मुमताज और शाहजहां की मजार ताजमहल में है। यह मकबरा बाद में ताजमहल के निर्माण के समय बादशाह शाहजहां के लिए एक मॉडल के रूप में देखा गया और बहुत कुछ इसकी डिजाइन को ताजमहल की डिजाइन में भी शामिल किया गया।
बुरहानपुर में हुआ था मुमताज महल का देहांत
इतिहासकारों के अनुसार यह नायाब मकबरा बुरहानपुर की अनमोल धरोहर है। गौरतलब है कि मुगल सम्राट शाहजहां की बीवी मुमताज महल का देहांत भी बुरहानपुर में हुआ था। उनकी देह को यहां ताप्ती नदी के किनारे आहूखाने में छह माह तक रखा गया था। जब आगरा का ताजमहल बनकर तैयार हुआ तो यहां से अस्थायी कब्र से मुमताज महल के शव को निकालकर आगरा में ताजमहल में दफनाया गया।


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