नमस्ते दोस्तों आज हम आहुखाना के बारे में जानेंगे जैसे की यह किसने बनाया है, इसका निर्माण क्यों किया गया, इसके पीछे क्या राज छुपे है ये सारी जानकारी आज में आपको इसी पोस्ट में देने वाला हु। उम्मीद करता हु के आपको मेरी दी गई जानकारी पसंद आएगी, तो चलिए आपका ज्यादा समय ना लेते हुए शुरू करते।
अपने विचार
दोस्तों यह स्थान एक बहुत अच्छी जगह है, यहाँ कई पर्यटक घूमने फिरने आते है और यहां का आनंद लेते है यहाँ का माहौल शाम के समय बहुत ही रोमांचक होता है ऐसा लगता है की यही पर रुक जाया जाये, ठंडी ठंडी हवाएं चलती है और शांत माहौल रहता है।
इतिहास
खानदेश की राजधानी रहा बुरहानपुर एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है, जिसे मुगलों की दूसरी राजधानी भी कहा जाता रहा है। बुरहानपुर में पहले तो अकबर, जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब जैसे कई राजाओ, मुगलो ने शासन किया। आहूखाने का संबंध फारूकी शासनकाल से है। फारुकी राजाओ ने इस अहुखने का निर्माण करवाया था, इसका निर्माण बुरहानपुर से लगभग 2 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है ताप्ती नदी के किनारे एक गांव जैनाबाद में है।फारुकी राजाओं को हराने के बाद अकबर ने अपने एक पुत्र जिसका नाम दानियाल था को इस इलाके का सूबेदार बनाया (नियुक्त किया) था। दानियाल यहाँ हमेशा शिकार के लिए आया करता था। अहुखाना धीरे धीरे उजड़ने लगा उसके उजड़ने का कारण दानियाल की मृत्यु था। दानियाल की मृत्यु के बाद जहांगीर ने यहाँ शासन किया उसके शासन काल में आहूखाने में एक महल का निर्माण करवाया गया और इसी के साथ आहुखाना नूरजहाँ के लिए सबसे पसंदीदा जगह बन गई।
नाम आहुखाना क्यों रखा गया
आहूखाने में हिरन रहा करते थे इसलिए इसका नाम आहुखाना रखा गया, आहूखाने का अर्थ हीरणो का बाड़ा होता है इसलिए इसको अहुखाना नाम दिया गया।
निर्माण किसने करवाया
फारूकी राजाओं ने अपने शासनकाल में इस विशाल बाड़े (आहुखाना ) का निर्माण करवाया था,
मुमताज के शव को छह माह तक रखा गया था यहाँ
जब मुगल सम्राट शाहजहां अपने दक्षिण के अभियान पर थे और उनका ठिकाना बुरहानपुर था तब बुरहानपुर में उनकी पत्नी मुमताज महल भी साथ में थी। मुमताज महल की मृत्यु अपने 14वें संतान को जन्म देते समय बुरहानपुर में ही हो गई थी। अपनी प्रिय पत्नी की मृत्यु से शाहजहां को गहरा दुःख हुआ और उन्होंने निर्णय लिया कि मुमताज महल की याद में प्रेम के प्रतीक के रूप में एक बेजोड़ मकबरा बनवाया जाये और मुमताज महल को बुरहानपुर के जैनाबाद स्थित आहूखाने में दफनाया गया। शाहजहां की इच्छा थी कि मकबरा बुरहानपुर में बनाया जाए। देश-विदेश के विख्यात वास्तुकार आए और उन्होंने बताया कि जैसा मकबरा बनाया जाना है, वह ताप्ती नदी के किनारे नहीं बनाया जा सकता। यहां की मिट्टी उस तरह के इमारत के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा राजस्थान के मकराना से संगमरमर लाना भी यहां संभव नहीं दिख रहा था।
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कुण्डी भंडारा, बुरहानपुर (खुनी भंडारा)2021/04/kundi-bhandara-khuni-bhandara-burhanpur.html


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