Travel to Burhanpur, बुरहानपुर की यात्रा

कुछ अपनी बात   
हेलो दोस्तों आज में आपको बुरहानपुर के कुछ ऐसी जगह के बारे में बताऊंगा जहा पर यात्रा करना करने में बड़ा आनंद आता है। कई लोग यहाँ सिर्फ घूमने के इरादे से भी आते है क्योकि यहाँ पर कई ऐसी प्राचीन स्थल है जो यहाँ का इत्तिहास आज भी बया करती है, अगर आपने मेरे पहले वाले पोस्ट पढ़े है तो आप जानते ही होंगे और अगर आपने मेरे पहले वाले पोस्ट नहीं पढ़े है तो में आपको इस पोस्ट के एन्ड में उनका लिंक दे दूंगा आप वहा से पढ़ सकते है।


बुरहानपुर 
दोस्तों बुरहानपुर वैसे तो एक ऐतिहासिक शहर है पर यहाँ आने के लिए आपको कोई ज्यादा प्लानिंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योकि क्योकि बुरहानपुर के station पर आते ही आपको कुछ auto (टेम्पो) वाले मिलेंगे जिनको आप सिर्फ इतना बता दीजिए के आपको कहा जाना है, वह auto वाला आपको बराबर वही लेकर चला आएगा कोई परेशानी वाली बात नहीं होगी।  

यात्रा 
बुरहानपुर की यात्रा करना आपके लिए एक यादगार पहलू बन जायेगा क्योकि बुरहानपुर विरासतों की भूमि रही है। बुरहानपुर की यात्रा का आपके लिए अनोखा अनुभव होगा। बुरहानपुर जिले में 100 से भी अधिक धरोहरें आपको देखने को मिलेगी।  पुरातत्व व पर्यटन की सूची में अभी तक इनमें से कुछ ही सूचीबद्ध हो सकी हैं। इसलिए कुछ विरासतों के बारे में लोगो को अब तक पता भी नहीं है।   



                                                      नागझिरी घाट पर स्थित ज्योतिर्लिंग 

श्रीराम का भ्रमण 

भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के समय ताप्ती तट के जितने हिस्से में भ्रमण किया, उसका स्कंद पुराण के ताप्ती महात्म्य में उल्लेख है। नागझिरी घाट पर श्रीराम ने अपने पिता महाराज दशरथ का पिंडदान भी किया है, प्रभु ने  शिवलिंग की स्थापना भी की थी। इस घाट पर 12 शिव मंदिर हैं, जिन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग का स्वरूप माना जाता है। यहां राम झरोखा मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता की प्रतिमा वनवासी रूप में विद्यमान है। यह स्थान पुरातन समय में संतों, महात्माओं को खूब आकर्षित करता रहा। उन्होंने इसी स्थान को अपनी साधनास्थली बनाया। यहाँ के पुजारी का कहना है की यह क्षेत्र पहले दंडकारण्य वन का हिस्सा था, जहां खर और दूषण नाम के दो राक्षस रहा करते थे उन राक्षसों ने यहाँ के ऋषि-मुनियों के जीवन में आतंक मचा रखा था, जब श्रीराम यहाँ पहुंचे तो उन्होंने खर-दूषण का अंत कर ऋषि-मुनियों को उनके अत्याचार से मुक्ति दिलाई और ताप्ती नदी को पार कर पंचवटी के लिए रवाना हुए।


नागझिरी घाट पर स्थित श्री रामेश्वर हनुमान मंदिर 


सिख गुरुओ का भी हुआ आगमन 

बुरहानपुर शहर सिख समाज का भी धार्मिक पर्यटन स्थल रहा है। यहां पर सिखों के प्रथम श्री गुरु नानकदेव जी महाराज एवं दसवें श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज पधारे थे और कुछ समय वे यहां पर रहे थे। आज भी यहां पर राजघाट और लोधीपुरा में गुरुद्वारा स्थित है, जहां आज भी श्रद्धालु अपना मत्था टेकने आते है। यह गुरुद्धारा अमृतसर से नांदेड़ के बीच सिख समाज का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है। यहां सिख समाज के 10वें गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने सन् 1708 में पंजाब से नांदेड़ गमन के दौरान 6 महींने और 9 दिन निवास कर अपने श्रीमुख से उच्चारित और संत हठेसिंहजी से लिखवाए गए गुरु ग्रंथ साहेब पर हस्ताक्षर कर इसे अमर बना दिया। यहां श्री गुरूगंथ साहेब की सुनहरी बीड होने से यह स्थल अत्यंत पवित्र हो गया।


दरगाह-ए-हकीमी

ऐतिहासिक नगर बुरहानपुर से लगा हुआ लोधीपुरा गांव है, यहां बोहरा समाज का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल दरगाह-ए- हकीमी मौजूद है। यहां पर प्रतिवर्ष हजारों जायरीन आकर जियारत करते हैं।

असीर का किला 

बुरहानपुर से लगभग 22 किलोमीटर की  दुरी पर असीर गांव स्थित है जहा पर पहाड़ियों एक किला है जिसे असीर का किला कहते है इस किले के बारे में कहा जाता है की यहाँ पर आज भी अश्वत्थामा थामा आते है कुछ लोगो को तो अश्वत्थामा के आने के प्रमाण भी मिले है। किले के बारे में कहा जाता है की आज भी महाभारत काल के अश्वत्थामा अपने पिता गुरु द्रोण की हत्या का बदला लेने के लिए अब भी भटक रहे हैं। कई बार अश्वत्थामा गांव वालों को भी दिखाई दिए हैं। यह अश्वस्थामा  आते है और शिव जी की पूजा कर 1 फुल रखते है। कुछ समय पहले  किसी न्यूज़ चैनल के रिपोटर ने रात भर इस किले पर रहने का निर्णय लिया और रात भर वह अश्वस्थामा को देखने के लिए रुके भी परन्तु सुबह 4 लगभग उनकी आँख कुछ ही समय के लिए लगी और उतनी देर में वह कोई पूजा करके चला भी गया इसका मतलब यह हे की कोई कुछ अश्वस्थामा वहां आकर भगवान् शिव की पूजा करते ही है|  महाभारत काल लगभग 5000 वर्ष पहले का माना जाता है, इतने वर्षों बाद भी अश्वत्थामा का जिंदा रहना महाभारत की कहानी बयां करता है, जिसमें कृष्ण ने उन्हे अमरता का वरदान दिया था। गांव वालों का कहना है कि अश्वत्थामा किले में बने शिव मंदिर में रोज शिव की आराधना करने आता है। कई ग्रामीणों ने इसे देखा है और खेत व सतपुड़ा के जंगल में भी इनके बड़े-बड़े पांव देखे हैं। यहां तक की एक पुलिसकर्मी को भी अश्वत्थामा ने घायल किया है।

सीता नहानी 
प्रभु श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण जी बुरहानपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर बलड़ी गांव के पास भी ठहरे थे। यह जगह आज भी सीता गुफा के नाम से प्रसिद्ध है, यहां एक झरना है जो हमेशा बहता ही रहता है। बुरहानपुर से लगभग 30 किलोमीटर नेपानगर के भीड़ गांव में एक जगह ऐसी है जहा सीता नहानी स्थित है, कहा जाता है की वनवास के दौरान सीता मैया को स्नान के लिए सरोवर नहीं मिला, तो लक्ष्मणजी ने अपने बाण से प्रहार कर यहां पर एक कुंड का निर्माण कर दिया था, जिसमे से आज भी निर्मल धारा बहती रहती है। यह जगह आज भी सीता नहानी के नाम से जानी जाती।

कुण्डी भंडारा 

आज से 409 साल पहले इसका निर्माण हुआ है। यह कुण्डी भंडारा मुग़ल काल का बना  हुआ है, सन 1612 में निर्माण हुआ था, बुरहानपुर के सूबेदार अब्दुर्रहीम खान ए खाना ने उस समय हो रही पानी की किल्लत से निजात पाने के लिए इसका निर्माण करवाया था। जो आज भी बुरहानपुर शहर को पानी की पूर्ति कर रहा है। इसी वजह से बुरहानपुर शहर में इसका निर्माण होना एक वरदान साबित हुआ है।  इनका निर्माण जमींन से 80 से 90 फिट अंदर किया गया है यह सोचने वाली बात है की उस समय सतपुड़ा की पहाड़ियों को काट कर या चिर कर किए इसका निर्माण किया गया होगा। इसमें पानी का मुख्य स्त्रोत सतपुड़ा की पहाड़ी और झरनो में है। इन नहरों के जरिये जमींन के अंदर से पानी का पुरे शहर में वितरण तो होता ही है साथ ही कुछ जगह पर इसकी कुंडीया बाहर भी बानी हुई है जिसमे से पानी निकला  जाता है।  इसका पानी बहुत ही साफ और शुद्ध होने के साथ-साथ पीने में बहुत ही मीठा लगता है।  


निर्माण किसने किया         -   अब्दुर्रहीम खान ए खाना 

निर्माण  कब  हुआ            -  सन 1612

निर्माण क्यों किया रहा       -   पानी की किल्लत से निजात पाने के लिए 

गहराई कितनी है              -   80 फिट

कितनी है कुंडिया             -  101  ( कुछ धस कर मिट चुकी है )  


ताप्ती नदी का बुरहानपुर में हुआ है संगम 

वैसे तो कहा जाता है की ताप्ती नदी किसी भी नदी में नहीं मिलती पर बुरहानपुर में ताप्ती नदी का संगम हुआ है पर यह नदी किसी भी नदी के पानी को अपने में मिलने नहीं देती। बुरहानपुर से 4 किलोमीटर की दुरी पर मोहना संगम पर ताप्ती और मोहना नदी का संगम हुआ है। इस जगह पर एक शिव जी शिव जी का मंदिर है जो बहुत प्राचीन है, शिव मंदिर से देखे जाने पर मोहना और ताप्ती का संगम स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। और दूसरा संगम है उतावली नदी पर यहाँ पर भी वही नजारा देखने को मिलता है ताप्ती नदी अपने में उतावली नदी  का पानी मिलने  नहीं देती उतावली का पानी एक साइड से चला जाता है।   

  शॉर्टकट 

  • ताप्ती नदी की लम्बाई     -    740 km
  •  उदगम                         -   बैतूल के पास मुक्ताई 
  •  कहा  तक जाती है         -    गुजरात स्थित खम्भात की खाड़ी, अरब सागर 


बुरहानपुर के  जानकारी के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे और मेरी website को  follow करे।  

 

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