Tapi river problems Solution & Experience to visit Tapi river

  • हेलो फ्रेंड्स आज हम ताप्ती नदी ( tapi river ) के बारे में कुछ बताने वाले है जैसे की ताप्ती नदी पर जो गन्दगी हो रही है उसका solution क्या है, ताप्ती नदी पर visit करते समय मेरा Experience कैसा रहा।  
क्यों हो रही है गन्दगी 
तो चलिए शुरू करते है दोस्तों जब में ताप्ती किनारे गया तो वहा पर बहुत सी गन्दी देखने को मिली फ़िलहाल में बात कर रहा हु बुरहानपुर के राजघाट और सतियारा घाट की दोनों ही जगह पर भरपूर गंदगी देखने को मिली कुछ यहाँ पर नदी का पानी बिलकुल हरे रंग में बदल गया है। पानी में कई तरह की गन्दी पड़ी रहती है, जैसे पन्निया, कूड़ा, कचरा और हम जो घर में पूजा पथ करते है उसमे पूजा का जो सामान निकलता है वह भी नदी किनारे पड़ा देख्नते को मिला है। इतना  ही नहीं कई मेने तो  यहाँ तक देखा की नालियों का पानी एक बड़े नाले से होते हुए सारा गन्दा पानी ताप्ती में मिल रहा है। जब ऐसा हाल रहेगा तो कहा से ताप्ती शुद्ध हो पायेगी।  वैसे तो कई बार मेने देखा है की कई लोगो द्वारा ताप्ती शुद्धिकरण का अभियान चलाया जाता है पर कुछ समय पश्चात वह लोग भी आना बंद हो जाते है।  


शुद्धिकरण के लिए क्या करे

ताप्ती को पूर्ण रूप से शुद्ध करना या रखना किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं है हमें सभी को मिल कर इसमें भाग लेना होगा और पूरी ईमानदारी के साथ इसमें जुट जाना होगा तभी हम ताप्ती को शुद्ध कर पाएंगे। 

  • नालियों का पानी इसमें प्रवाह ना होने दे। इसके लिए अलग से कही पर एक गड्ढ़ा या कुंड बनाया जाये जिसमे सारा गन्दा पानी इकठ्ठा हो सके और नदी में ना जा पाए।  
  • अपने घर का पूजा पाठ का जो सामान होता है उसे  नदी  में ना डाले और यदि कोई हमें ऐसा करता हुआ दिखाई देता है तो उसे भी हमें रोकना चाहिए और उस सामान को सर्कार द्वारा जो कुंड बनाये गए है उसमे डाला जाये, और समय समय पर उसकी सफाई भी की जाना चाहिए।  
  • कई जगह मेने देखा की बड़ी बड़ी फेक्ट्रियो का गन्दा जहरीला पानी भी नदियों में प्रभाव किया जा रहा है उसे भी हमें रोकना होगा क्योकि उससे पानी तो गन्दा हो ही रहा है साथ ही मछली या पानी में रहने वाले सभी जीवो को नुकसान है।  
  • कई जगह मेने देखा की हरे कलर की काई ( हरी खास ) नदी के किनारे जमी पड़ी है उसे समय समय पर निकलवाना चाहिए तभी ताप्ती नदी शुद्ध हो पायेगी। 
  • कई जगह पर तो कपडे, कचरा, पन्निया, लकडिया, आदि कचरा भी दिखाई दिया जिसका साफ होना अत्यंत आवश्यक है यदि ऐसा नहीं किया गया तो वह साडी गन्दी साद कर उसकी बदबू आने लगेगी और जो लोग वह जाते है या जिनका नदी किनारे माकन है वह बीमार पड़ने लगेंगे। 

  • जनता का जागरूक होना, यदि आपकी आखो के सामने कोई नदी में किसी भी प्रकार का कचरा, पन्नी, पूजा सामग्री, नदी में डालता है तो तुरंत उसे रोक कर समझाइश नदी जाये और उसे शुद्धिकरण के लिए प्रेरित किया जाये।   

भावसार जी से चर्चा 

जब में नदी पर गया तो ताप्ती शुद्धिकरण के लिए वहां पर टहल रहे बलिराम भावसार जी से बात करने पर उन्होंने बताया की ताप्ती शुद्धिकरण एक बहुत अच्छी बात है हमें इस पर विचार करना चाहिए नदी में कई लोग अपने घरो से पूजा सामग्री लेकर आते है उन्हें जागरूक करना होगा और वह पूजा सामग्री नदी की बजाये जो कुंड सरकार द्वारा बनाये गए है उसमे डालने की सलाह देनी होगी और लोगो को स्वयं भी यह ध्यान रखना होगा के नदी में  किसी भी प्रकार की गन्दगी ना हो। बलिराम भावसार जी कहते है की ना  जितने भी लोग नदी किनारे रहते है उन्हें दिन भर में थोड़ा सा समय निकाल कर नदी पर आना चाहिए और यहाँ का जो कचरा है उसे कचरा गाड़ी में डालना चाहिए  ऐसा लगातार करते रहे तो जल्दी ही  वो दिन  भी आजायेगा  जब नदी  का पानी शुद्ध और साफ हो जायेगा। बलिराम भावसार जी यह भी कहते है की कई जगह पर ताप्ती का पानी रोक लिया जाता है, जिससे ताप्ती में बहाव नहीं रहता पानी एक ही जगह पर रहता है रुके हुए पानी में काई ( हरी खास ) जम जाती है और रुके हुए पानी में कई प्रकार की गन्दगी भी हो जाती है तो है। इसलिए समय-समय पर थोड़ा थोड़ा  पानी छोड़ना चाहिए ताकि ताप्ती का पानी एक जगह ठहरा न होकर बहता रहे।  इससे ताप्ती अपने आप क्लीन होती जाएगी।  



ताप्ती नदी पर visit करके मुझे कैसा लगा 

दोस्तों ताप्ती नदी पर visit करके मुझे बहुत अच्छा लगा क्योकि ताप्ती सूर्य की पुत्री है और शनि की बहन इतना ही नहीं इसके किनारे भगवान् श्रीराम भी आ चुके है। जब में ताप्ती नदी के राजघाट पर गया तो  वह का नजारा देखने योग्य था बहुत ही आनंद आ रहा था ऐसा लग रहा था मनो यही रुका जाये। यहाँ पर देवी देवताओ के मंदिर बने हुए है, यहाँ  का नजारा बहुत ही सुन्दर दिखाई देता है।  इसी तरह जब में सतियारा घाट पर गया तो यहाँ पर भी बहुत से मंदिर देखने को मिले इस घाट पर साल में 3 दिन तक बालाजी भगवान का मेला लगता है यह मेला लगभग 350 साल से लगता चला आ रहा है।  

श्री राम आये थे यहाँ 

जब में नागझिरी के घाट पर गया तो पता चला के यहाँ पर राम ज़ारोका मंदिर है जहा श्रीराम वनवास के दौरान आये थे और उन्होंने यह 1 दिन विश्राम भी किया था बुरहानपुर उन पावन स्थलों में शामिल है जहा की भूमि पर हमारे प्रभु श्रीराम के पावन कदम पड़े है। कहा जाता है की 14 वर्ष के वनवास के दौरान हमारे प्रभु श्रीराम बुरहानपुर आये थे। ऐसी मान्यता है की जिस समय प्रभु आये थे उस समय बुरहानपुर को ब्रम्हपुर के नाम से जाना जाता था।

यहाँ अपने पिता का श्राद्ध किया था

हमारे प्रभु श्रीराम ने यहां से निकलने वाली ताप्ती और उतावदी नदी के संगम की जगह पर अपने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था उस दिन के बाद से उस स्थान को रामघाट के नाम से जाना जाता है। यह घाट बुरहानपुर शहर के इतवारा मोहल्ले के नागझिरी घाट के समीप है।


                                   
                             यह है बुरहानपुर के राजघाट का शाम के समय का नजारा

दो राक्षसों का वध कर पंचवटी के लिए हुए रवाना

प्रभु श्रीराम ने ताप्ती नदी के किनारे एक मंदिर भी बनाया था जिसको अब राम झरोखा मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहाँ के पुजारी का कहना है की यह क्षेत्र पहले दंडकारण्य वन का हिस्सा था, जहां खर और दूषण नाम के दो राक्षस रहा करते थे उन राक्षसों ने यहाँ के ऋषि-मुनियों के जीवन में आतंक मचा रखा था, जब श्रीराम यहाँ पहुंचे तो उन्होंने खर-दूषण का अंत कर ऋषि-मुनियों को उनके अत्याचार से मुक्ति दिलाई और ताप्ती नदी को पार कर पंचवटी के लिए रवाना हुए।

प्रभु श्रीराम ने जो राम झरोखा मंदिर बनाया था वहा पर आज श्रीराम की बहुत ही सुन्दर मूर्ति भी स्थित है जिसकी लोग आज भी पूजा करते है। कहा जाता है की रामायण और महाभारत काल के साक्षी रहे इस बुरहानपुर शहर में मौजूद श्रीराम के स्थानों को लेकर लोगों में बहुत आस्था है, उनके साथ लक्ष्मण जी और सीता मैया के अलावा भक्त श्री हनुमान जी भी मौजूद हैं।


राजघाट पर बिच नदी में है हाथी

लगभग 350 साल पहले राजा जयसिंघ युद्ध में मरे हुए अपने हठी की याद में एक हाथी का निर्माण करवाया। इस हाथी का निर्माण नदी में पड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है। ऐसा कहा जाता है की एक बड़ी सी चट्टान को हाथी का आकर दिया गया है जो आज भी नदी के बीचो - बिच स्थित है। सन 2019 में ताप्ती नदी का जलस्तर काफी घट गया था नदी इतनी सुख गई थी के हाथी पूरा दिखने लगा था। इस ताप्ती नदी में जब बाढ़ का पानी अत है तो अच्छे अच्छे पेड़ भी टूट कर बाह जाते है पर इस हाथी पर बाढ़ का कोई असर नहीं हुआ। इस राजघाट का निर्माण राजा जयसिंग ने करवाया था।
                                     

यह हाथी नदी के बीचोबीच है यह तस्वीर नदी का जलस्तर कम होने के दौरान ली गई है।




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